नए सत्र से बढ़ेगी परेशानी, 170 स्कूलों में रह जाएगा सिर्फ एक शिक्षक
The new session will increase the problem, 170 schools will have only one teacher.

कोरबा: जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अब केवल 15 दिन शेष हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि कई विद्यालयों में वर्षो से एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षकों को आश्रम छात्रावासों में अधीक्षक के रूप में अटैच कर दिया गया है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
जिले के विभिन्न आश्रम छात्रावासों में अधीक्षक पद रिक्त होने के कारण करीब 40 शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वहां पदस्थ किया गया है। इनमें अधिकांश शिक्षक ऐसे विद्यालयों से लिए गए हैं जहां पहले से ही शिक्षकों की कमी बनी हुई थी। परिणामस्वरूप कई स्कूल एकल शिक्षकीय बन गए हैं।
पिछले शिक्षा सत्र में जिले में 121 स्कूल ऐसे थे जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे शिक्षण कार्य संचालित किया गया। इस वर्ष सेवानिवृत्ति और पदोन्नति के कारण शिक्षकों की संख्या और कम होगी, जिससे एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या बढ़कर लगभग 170 तक पहुंच सकती है। जिले में वर्तमान में 1,526 प्राथमिक और 513 माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में आवश्यक स्वीकृत पदों की तुलना में 400 से अधिक शिक्षक पद रिक्त बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, 186 आश्रम छात्रावासों में भी अधीक्षक के लगभग 40 पद खाली हैं। आगामी सत्र में कुछ और अधीक्षकों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है, जिससे रिक्त पदों की संख्या 50 तक पहुंच सकती है। शिक्षकों के लगातार सेवानिवृत्त होने और अन्य कारणों से पद रिक्त होने के बावजूद नए शिक्षकों की नियमित भर्ती नहीं हो पा रही है। इसी का परिणाम है कि शिक्षा विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में शिक्षकों को छात्रावासों में अटैच करना पड़ रहा है। इससे स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
परीक्षा परिणाम पर असर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की बुनियादी शिक्षा पर पड़ता है। एक शिक्षक को कई कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है, जिससे सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से ध्यान देना संभव नहीं हो पाता। शिक्षकों की कमी का प्रभाव जिले के परीक्षा परिणामों में भी दिखाई दे रहा है। हाल ही में घोषित हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों में जिले का कोई भी विद्यार्थी प्रदेश की टाप-10 मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सका। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता न होने के कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी प्रभावित हुई है।
युक्तियुक्तकरण के मामले कोर्ट में लंबित
विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया लागू की गई थी। हालांकि इस प्रक्रिया के बाद 100 से अधिक शिक्षकों ने अपने नए पदस्थापना स्थल पर समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। विभाग द्वारा वेतन रोकने और नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई भी की गई, लेकिन कई शिक्षक न्यायालय की शरण में पहुंच गए।इन मामलों के न्यायालय में लंबित रहने के कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति बनी रही और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती रहीं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अस्थायी शिक्षकों के भरोसे चल रहे आत्मानंद विद्यालय
जिले में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंग्रेजी माध्यम के तीन आत्मानंद विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा सीजी बोर्ड से संबद्ध आत्मानंद विद्यालय भी संचालित हैं। लेकिन स्थापना के पांच वर्ष बाद भी इन स्कूलों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है।हर वर्ष संविदा अथवा अस्थायी शिक्षकों की भर्ती की जाती है, जिसकी प्रक्रिया में तीन से चार माह का समय लग जाता है। इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षा सत्र के शुरुआती महीनों में कई विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पातीं, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
नवीन शैक्षणिक सत्र की तैयारियां शुरू कर दी गई। स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं हाेने दी जाएगी। जिन स्कूलाें में शिक्षक के पद रिक्त है वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नियुक्त किए जाएंगे। आश्रम छात्रावासोंं अधीक्षक पद पर अटैचमेंट शासन के अनुमति से की गई है। तामेश्वर उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी
कुछ मुख्य बातें—
पढ़ाई छोड़ हॉस्टल संभाल रहे गुरुजी: जिले के आदिवासी और दूरस्थ अंचलों में स्थित प्राथमिक शालाओं के मुख्य शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के बजाय हॉस्टल का राशन और लॉजिस्टिक्स संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
बुनियादी शिक्षा पर तगड़ी चोट: प्राथमिक स्तर पर जब एक ही शिक्षक को एक साथ पहली से पांचवीं तक की कंबाइंड कक्षाएं लेनी पड़ती हैं, तो बच्चों का ‘फाउंडेशन’ पूरी तरह कमजोर हो जाता है।
भर्ती प्रक्रिया की सुस्ती भारी: नए शिक्षा सत्र की शुरुआत जून के मध्य से हो रही है, लेकिन संविदा शिक्षकों की समय पर ज्वाइनिंग न होने से शुरुआती तीन महीने अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कोर्स पिछड़ जाता है।
कोर्ट की शरण में शिक्षक: युक्तियुक्तकरण (शिक्षकों के युक्तिकरण और ट्रांसफर) के तहत ट्रांसफर किए गए दर्जनों शिक्षकों द्वारा स्टे ले आने के कारण विभाग के हाथ बंधे हुए हैं।
