PMO में शिकायत पड़ी भारी, गरीब का घर ढहाया
Complaint to PMO proved costly, poor man's house demolished

बिलासपुर। ग्राम दोमुहानी में शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब विवादों के घेरे में आ गई है। पीएमओ में शिकायत करने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि राजस्व अमले ने मुख्य अतिक्रमणकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसका ही मकान ढहा दिया। घटना के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
ग्राम दोमुहानी स्थित खसरा नंबर 202 की लगभग 0.69 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामले में अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय द्वारा सुमंत कुमार समेत अन्य कब्जाधारियों के खिलाफ बेदखली वारंट और कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई महीनों तक जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया।
कार्रवाई नहीं होने से परेशान शिकायतकर्ता ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित का आरोप है कि इसी शिकायत से नाराज राजस्व अधिकारी सोमवार को बैकहो लोडर लेकर गांव पहुंचे और कार्रवाई शुरू की। हालांकि, जिन लोगों के खिलाफ पहले से बेदखली आदेश जारी थे, उनके निर्माण को नहीं तोड़ा गया। इसके उलट शिकायतकर्ता का मकान ही ढहा दिया गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि मुख्य अतिक्रमणकारी को राजस्व अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। उसने बताया कि आठ महीने पहले ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी हो चुका था, लेकिन कार्रवाई के दौरान उसे पूरी तरह छोड़ दिया गया। वहीं एक अन्य कब्जाधारी ने कार्रवाई की आशंका में स्वयं ही कब्जा हटा लिया।
वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
मामले को लेकर पहले भी विवाद सामने आया था। पीड़ित द्वारा एक वीडियो सार्वजनिक किया गया था, जिसमें राजस्व अधिकारी उस पर पीएमओ में शिकायत करने को लेकर नाराजगी जताती दिखाई दे रही थीं। पीड़ित का दावा है कि उस पर केस वापस लेने और समझौता करने के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि रसूखदार अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन कठोर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, जबकि शिकायत करने वाले गरीब व्यक्ति को नुकसान उठाना पड़ा। इससे राजस्व विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इधर मामले में एसडीएम बिलासपुर मनीष साहू ने कहा कि बेजा कब्जाधारियों के अवैध निर्माण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान दो कब्जे हटाए गए, जबकि तीसरे व्यक्ति ने स्वयं कब्जा छोड़ दिया था। यदि कार्रवाई में किसी प्रकार की विसंगति सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
