छत्तीसगढ़ (सबसे ज़रूरी)

कोरबा में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला स्तरीय सम्मेलन का गरिमामय आयोजन

A dignified district-level conference of the Chhattisgarh Official Language Commission was held in Korba.

कोरबा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में जिला स्तरीय सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इस अवसर पर राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने सुमधुर माँ शारदे वंदना प्रस्तुत की, वहीं संतोषी महंत “श्रद्धा” एवं घनश्याम श्रीवास ने भावपूर्ण छत्तीसगढ़ महतारी वंदना की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री माननीय श्री लखन लाल देवांगन ने की। मंच पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में कोरबा महापौर माननीया संजू देवी सिंह राजपूत, नगर पालिक निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग, पार्षद नरेंद्र देवांगन तथा पद्मश्री सुरेंद्र दुबे की धर्मपत्नी श्रीमती शशि दुबे के साथ साथ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा एवं सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार मंचासीन रहे।

सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ, बैज और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक परिधान ‘खुमरी’ पहनाकर आत्मीय स्वागत डाक्टर अभिलाषा बेहार एवं जिला संयोजक दिलीप अग्रवाल द्वारा किया गया। ‘जय बूढ़ादेव कर्मा नृत्य दल’ तथा ‘सैंडी डांस अकादमी’ के बच्चों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वागत उद्बोधन आयोग के सचिव डॉ.अभिलाषा बेहार ने प्रस्तुत किया। राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थापित करने के लिए आयोग हर संभव प्रयास कर रहा है और यह हमारी अस्मिता की लड़ाई है। मुख्य अतिथि श्री लखन लाल देवांगन ने आयोजन की सफलता पर बधाई देते हुए छत्तीसगढ़ी बोली व संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला।

समारोह में अंचल के विख्यात साहित्यकारों डॉ. गिरिजा शर्मा, डोरेलाल कैवर्त, रामकली कारे एवं संतोष मिरी की प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ कवि उमेश अग्रवाल एवं दीप दुर्गवी को उनके अप्रतिम साहित्यिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। पं. मुकुटधर पांडेय के परिवार से हनी तिवारी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का सफल संचालन डॉ कृष्ण कुमार चंद्रा ने किया।

द्वितीय सत्र में जीतेन्द्र वर्मा ‘खैरझिटिया’ के संचालन में “पुरखा के सुरता” चर्चा गोष्ठी संपन्न हुई। इसमें आशा देशमुख एवं आशा आजाद ने पद्मश्री पं. मुकुटधर पांडेय के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला, वहीं घनश्याम श्रीवास एवं तिलोत्तमा पांडे ने वरिष्ठ कवि भागवत कश्यप के साहित्यिक अवदान को जीवंत किया।सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, भव्य पुस्तक प्रदर्शनी और विशेष ‘सेल्फी स्टैंड’ का आकर्षण रहा। हजारों पुस्तकों की प्रदर्शनी ने साहित्यकारों और पाठकों को छत्तीसगढ़ी साहित्य पर गर्व का अनुभव कराया।

 

तृतीय सत्र में रशीदा बानो मार्कण्डेय के संचालन में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें कोरबा सहित बिलासपुर, रायगढ़, सक्ती और जांजगीर-नैला से आए लगभग 70,80 कवियों ने अपनी सुमधुर कविताओं से समां बांध दिया। साहित्यकारों और श्रोताओं को मिलाकर 250 से अधिक लोगों की गरिमामय उपस्थिति रही।आयोजन समिति की ओर से जिला समन्वयक मुकेश चतुर्वेदी ने राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित पूरी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस आयोजन को सफल बनाने में जिला संयोजक मुकेश चतुर्वेदी एवं दिलीप अग्रवाल, यूनुस दायालपुरी, कमलेश यादव, डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, बलराम राठौर, जीतेन्द्र वर्मा, संतोष मिरी, मनीष मुसाफिर, राधेश्याम साहू, अहिबरन पटेल, शिव साहू, धरम साहू, एकांश साहू, जगदीश श्रीवास, देवेंद्र राजपूत, अनुसुइया श्रीवास, रशीदा, अर्चना साहू, ज्योति दीवान एवं मुकुटधर साहित्य समिति के पदाधिकारियों व साहित्यकारों की सराहनीय भूमिका रही।

 

विशेष:-

कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन की अध्यक्षता और पद्मश्री सुरेंद्र दुबे की धर्मपत्नी शशि दुबे सहित दिग्गज विभूतियों की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ कार्यक्रम।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पुस्तक विमोचन, साहित्यकार सम्मान और भव्य कवि सम्मेलन से गूंजा पंडित जवाहर लाल नेहरू सभागार।

‘पुरखा के सुरता’ गोष्ठी में याद किए गए अंचल के पुरोधा साहित्यकार; छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प दोहराया गया।

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