छत्तीसगढ़ (सबसे ज़रूरी)

‘मेरे बेटे को जेल भेज दो साहब’, मां की मार्मिक गुहार

'Send my son to jail, Sir' — a mother's poignant plea.

अंबिकापुर। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता कार्यालय, अंबिकापुर। दोपहर करीब 12.30 बजे का समय। दफ्तर के बाहर एक महिला अपने जवान बेटे के साथ खड़ी है। आंखें सूजी हुई, चेहरा मुरझाया। अंदर प्रभारी अधिकारी बैठे हैं। महिला हिम्मत जुटाकर अंदर दाखिल होती है। साथ में बड़ा बेटा भी है। कुर्सी पर बैठते ही वह फफक पड़ती है।

साहब, मेरे छोटे बेटे को जेल भेज दो। अधिकारी चौंककर पूछते हैं, क्यों माताजी? महिला रोते हुए कहती है, नशीला इंजेक्शन लेता है साहब। घर में जो था सब बेच रहा है। मेरे और बहू के गहने तक बेच चुका है। अब घर का दूसरा सामान बेचने की जिद करता है। मना करो तो मारपीट पर उतर आता है। जेल चला जाएगा तो शायद नशा छूट जाए… कम से कम जिंदा तो रहेगा।

पास खड़ा बड़ा बेटा सिर झुकाए चुपचाप खड़ा है। उसकी आंखों में शर्म और बेबसी साफ दिख रही है। अधिकारी महिला को पानी का गिलास देते हैं और पूरी बात सुनते हैं। महिला बताती है कि बेटा पिछले कुछ समय से नशीले इंजेक्शन की गिरफ्त में है। पहले दोस्तों के साथ शुरू किया, अब हालत यह है कि अकेले भी इंजेक्शन लगाने लगता है। यह कोई एक प्रकरण नहीं है। ऐसे कई प्रकरण संभागीय आबकारी उड़नदस्ता के प्रभारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के पास सामने आ चुके हैं, जहां स्वजन खुद अपने बच्चों या परिवार के दूसरे सदस्यों को जेल भिजवाने की गुहार लेकर आ रहे हैं। लोग कहते हैं साहब, इसे पकड़ लो। 15-20 दिन जेल में रहेगा तो नशा उतर जाएगा। घर में रखेंगे तो या तो खुद मरेगा या हमें मार देगा।

दरअसल अंबिकापुर शहर में नशीले इंजेक्शन का प्रचलन खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। बड़ी संख्या में 18 से 30 साल के युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। नशे की पूर्ति के लिए युवा घर के जेवर, बाइक, मोबाइल तक बेच दे रहे हैं। कई घरों में मां, बहन और भाभी के गहने तक गायब हो चुके हैं। मोहल्लों में चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। पुलिस और आबकारी विभाग की सख्ती के बाद अब इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। अधिकारी बताते हैं कि चोरी-छिपे बेचने वालों ने इसका दाम इतना बढ़ा दिया है कि इस नशे के आदी युवा अब घर पर ही चोरी करने लगे हैं।

गढ़वा बन गया सप्लाई का हब

सरगुजा अंचल में नशीले इंजेक्शन की सबसे बड़ी खेप झारखंड के गढ़वा जिले से आ रही है। सूत्रों के मुताबिक गढ़वा और आसपास के कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा एजेंट तय किए गए हैं। ये एजेंट दुकान से थोक में नशीले इंजेक्शन उठाते हैं और अंबिकापुर-बलरामपुर के सीमावर्ती इलाकों में तीन से चार गुना दाम पर बेचते हैं। स्थानीय स्तर पर नशे के आदी हो चुके कई युवक खुद गढ़वा जाकर इंजेक्शन के डोज ला रहे हैं। बस और बाइक से आना-जाना लगा रहता है। झारखंड से आने वाली यात्री बसों की भी निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन नशे के सौदागर नए-नए रास्ते निकाल ले रहे हैं।

एक सिरिंज, कई नशेड़ी: एचआइवी संक्रमण का बढ़ा खतरा

नशीले इंजेक्शन का सबसे खतरनाक पहलू अब सामने आ रहा है। एक ही सिरिंज का उपयोग कई नशेड़ी एक साथ कर रहे हैं। इससे एचआइवी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अंबिकापुर में नशे के आदी युवकों में एचआइवी संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। आबकारी उड़नदस्ता द्वारा पकड़कर जेल भेजे गए आरोपितों का जब मेडिकल परीक्षण कराया गया तो उनमें से भी कुछ नशेड़ी एचआइवी संक्रमित पाए गए। चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमित सुई के जरिए एचआइवी संक्रमण के अलावा दूसरी बीमारियों का भी खतरा रहता है। नशे की लत में युवा अपनी जान तो जोखिम में डाल ही रहे हैं, परिवार को भी बर्बादी की कगार पर पहुंचा दे रहे हैं।

एक वर्ष में 50 से ज्यादा प्रकरण पंजीकृत

सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने बताया कि संभागीय आबकारी उड़नदस्ता सरगुजा की टीम नशीली दवाइयों के विरुद्ध पिछले एक साल में 50 से ज्यादा प्रकरण पंजीकृत कर चुकी है। कई लोगों को न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा जा चुका है। इसके बावजूद लोग नशीली दवाइयां बेचने से परहेज नहीं कर रहे हैं। इसी कारण ऑपरेशन क्लीन के तहत नशे के सौदागरों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उनका प्रयास है कि सरगुजांचल से नशीले इंजेक्शन के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त किया जाए, इसके लिए वे लगातार प्रयासरत हैं।

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