आरंग में 43 लाख गबन मामला, चार पूर्व सरपंचों के गिरफ्तारी वारंट
Embezzlement case involving ₹43 lakh in Arang; arrest warrants issued for four former Sarpanchs.

आरंग। पंचायत विकास कार्यों के लिए मिली सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और वसूली लंबित रहने के मामले में आरंग प्रशासन ने कार्रवाई की है। अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) अभिलाषा पैकरा ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 92(2) के तहत चार पूर्व सरपंचों के खिलाफ सिविल जेल वारंट जारी किया है। इन पूर्व जनप्रतिनिधियों से 43 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि की वसूली की जानी है।
प्रशासन के अनुसार, संबंधित पूर्व सरपंचों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने तथा बकाया राशि सरकारी खजाने में जमा करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। इसके बावजूद किसी ने न तो संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया और न ही राशि जमा की। इसके बाद न्यायालय ने उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए।
इन पूर्व सरपंचों पर कार्रवाई
जारी वारंट के अनुसार, नकटा के पूर्व सरपंच गोपाल चतुर्वेदी से 18,23,880 रुपये, देवदा के पूर्व सरपंच रोशन मिश्रा से 19,35,073 रुपये, नगपुरा की पूर्व सरपंच राजकुमारी साहू से 4,09,000 रुपये तथा राखी की पूर्व सरपंच चितरेखा साहू से 2,09,324 रुपये की सरकारी राशि की वसूली लंबित है।
राशि जमा करने पर मिलेगी रिहाई
एसडीएम अभिलाषा पैकरा ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत सरकारी राशि का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वारंट के आधार पर संबंधित पूर्व सरपंचों को सिविल जेल भेजा जाएगा और उनकी रिहाई तभी संभव होगी, जब वे पूरी बकाया राशि सरकारी खजाने में जमा कर देंगे।
सरकारी धन के दुरुपयोग पर रहेगा सख्त रुख
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पंचायत निधि के दुरुपयोग के मामलों में आगे भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सरकारी राशि जनता की संपत्ति है और उसके दुरुपयोग या गबन को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पंचायतों में वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में भी कड़ा संदेश गया है।
