छत्तीसगढ़ (सबसे ज़रूरी)

प्लेस ऑफ सेफ्टी से 3 अपचारी फरार, ग्रिल तोड़कर भागे

3 juvenile offenders escape from 'Place of Safety'; fled after breaking the grille.

अंबिकापुर : शहर के कन्या परिसर रोड बिशुनपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी से शुक्रवार सुबह तीन अपचारी बालक रोशनदान की ग्रिल का राड निकालकर फरार हो गए। घटना सुबह करीब 5:45 बजे की है जब रोज की तरह सभी बच्चों को योग के लिए उठाया गया था। इसी दौरान तीन बालक बाथरूम के रोशनदान से निकलकर भागने में सफल रहे।

प्लेस आफ सेफ्टी के परिवीक्षा अधिकारी नीतू राम कुशवाहा ने बताया कि केंद्र में कुल 49 अपचारी निरुद्ध थे। शुक्रवार सुबह योग के लिए सभी को जगाया गया था। इसी बीच तीन बच्चों ने बाथरूम के रोशनदान की ग्रिल का रॉड निकाला और वहां से निकल भागे।

घटना की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने खोजबीन शुरू की। पुलिस को भी तत्काल सूचना दी गई, लेकिन शाम तक फरार बच्चों का कोई सुराग नहीं लगा।

आठवीं बार आया था प्लेस आफ सेफ्टी में

प्लेस आफ सेफ्टी के परिवीक्षा अधिकारी नीतू राम कुशवाहा ने बताया कि फरार होने वाले अपचारी बालकों में दो कोरिया जिले के तथा एक बलरामपुर जिले का है। बलरामपुर जिले का अपचारी बालक आदतन है। वह आठवीं बार प्लेस आफ सेफ्टी में आया था। कोरिया जिले के दो अपचारी बालक भी फरार हुए हैं। ये दोनों न्यायाधीश के यहां चोरी की घटना में भी शामिल रहे हैं। ये दोनों पहले भी आपराधिक घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। ये दोनों भी पहले यहां आ चुके थे। उन्होंने बताया कि प्लेस आफ सेफ्टी का नया भवन अभी नहीं बन सका है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध हैं।

बाल संप्रेक्षण गृह से पहले भी हो चुकी भागने की घटनाएं

गौरतलब है कि प्लेस आफ सेफ्टी के बगल में ही बाल संप्रेक्षण गृह भी संचालित है। बाल संप्रेक्षण गृह से हालिया महीनों में दो बार बच्चे भाग चुके हैं। पहली बार 11 बच्चे फरार हुए थे जिनमें से 10 को वापस लाया गया। इसी महीने फिर 13 बच्चे भागे थे, जिनमें से 10 की वापसी हो चुकी है। हालांकि प्लेस आफ सेफ्टी से भागने की यह पहली घटना है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है प्लेस आफ सेफ्टी

प्लेस आफ सेफ्टी यानी ‘सुरक्षित स्थान’ किशोर न्याय अधिनियम-2015 के तहत स्थापित एक विशेष संस्था है। इसमें 16 से 18 वर्ष की आयु के उन किशोरों को रखा जाता है जिन्होंने जघन्य अपराध किया हो। यहां बच्चों को सुधार, पुनर्वास, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाता है। इनकी निगरानी महिला एवं बाल विकास विभाग करता है। सामान्य बाल संप्रेषण गृह से यह ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें गंभीर प्रकृति के मामलों में शामिल अपचारी रखे जाते हैं।

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