कम दृष्टि वालों को सरकारी नौकरी में आरक्षण नहीं, फैसले ने बढ़ाई बहस
No reservation in government jobs for the visually impaired; ruling sparks debate.

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों में अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगों को अलग से आरक्षण नहीं देने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। बिलासपुर हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस एके प्रसाद की बेंच ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
सरकार और PSC की ओर से इस याचिका की सुनवाई पर भी आपत्ति जताई गई है। कोर्ट ने इस आपत्ति पर अभी कोई फैसला नहीं दिया है और इसे खुला रखा है। अब सरकार और PSC के जवाब के बाद मामले की आगे सुनवाई होगी। इसकी अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
क्या है पूरा मामला?
भिलाई के विवेक सिंह ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने बताया है कि वे ‘स्टारगार्डट’ बीमारी से पीड़ित हैं और उनकी आंखों की रोशनी करीब 90 प्रतिशत कम है।
विवेक सिंह ने छत्तीसगढ़ PSC की कई भर्तियों के विज्ञापन भी कोर्ट में पेश किए हैं। उनका कहना है कि इन विज्ञापनों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने के बजाय सभी को एक ही श्रेणी में रखा गया है।
एक ही पद के लिए कई श्रेणियां शामिल
याचिका में उदाहरण देते हुए बताया गया है कि अगर किसी भर्ती में दिव्यांगों के लिए दो पद आरक्षित हैं, तो उसमें हाथ-पैर से दिव्यांग, अंधत्व या कम दृष्टि और सुनने में परेशानी वाले दिव्यांगों को एक ही श्रेणी में रखा जाता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी व्यवस्था में अंधत्व और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों को दूसरी तरह की दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के साथ उन्हीं आरक्षित पदों के लिए मुकाबला करना पड़ता है।
याचिकाकर्ता ने कहा- कानून में अलग आरक्षण का प्रावधान
याचिका में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 33 और 34 का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए कुल 4 प्रतिशत पद आरक्षित रखने का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इन 4 प्रतिशत पदों को अलग-अलग दिव्यांग श्रेणियों के हिसाब से बांटना होता है। इसमें 1 प्रतिशत पद अंधत्व या कम दृष्टि वाले दिव्यांगों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में इस नियम के अनुसार अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगों के लिए अलग से पद तय नहीं किए जा रहे हैं।
MP, ओडिशा और UPSC का भी दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश, ओडिशा और केंद्र सरकार की UPSC की IAS परीक्षा में अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगों के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
सरकार और PSC ने कहा- याचिका चलने योग्य नहीं
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद ददरिया और PSC की ओर से अधिवक्ता सुदीप अग्रवाल ने याचिका की सुनवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि याचिकाकर्ता अभी किसी भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो रहा है। ऐसे में उसकी मांग जनहित याचिका जैसी है। इसी आधार पर उन्होंने याचिका को स्वीकार करने पर सवाल उठाया।
याचिकाकर्ता ने कहा- पहले हुए नुकसान से प्रभावित हूं
इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पहले हुई भर्तियों में भी अंधत्व और कम दृष्टि वाले दिव्यांगों के लिए अलग से आरक्षण नहीं दिया गया था। उनका कहना है कि इससे इन श्रेणियों के लिए तय पदों का नुकसान हुआ है और इसका असर याचिकाकर्ता पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि इसलिए हाईकोर्ट को इस याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा?
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस एके प्रसाद ने फिलहाल यह तय नहीं किया कि याचिका सुनवाई के योग्य है या नहीं। कोर्ट ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ PSC को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
