ठेका प्रथा के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मियों का हल्लाबोल
Health workers up in arms against the contract system.

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग बढ़ाने के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिलासपुर कलेक्टोरेट पहुंचे दर्जनों स्वास्थ्यकर्मियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पैथोलाजी लैब का निजीकरण तुरंत रोकने, खाली पड़े पदों पर सीधी भर्ती शुरू करने और 2023 के आंदोलन में किए वादे पूरे करने की मांग उठाई है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष विकास कुमार शुक्ला के नेतृत्व में कर्मचारियों ने, कलेक्टर के जरिए अपनी 9 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सरकार को भेजा है। संघ ने कहा कि वर्ष 2023 में अनिश्चितकालीन हड़ताल के समय सरकार ने पुनरीक्षित वेतनमान देने का लिखित वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने से पहले वेतन विसंगति दूर नहीं हुई तो भारी नुकसान होगा।
कर्मचारियों का मुख्य विरोध सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब निजी कंपनी एच.एलएल को सौंपने और अमृत फार्मेसी खोलने को लेकर है। संघ का कहना है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ठप हो जाएगी। साथ ही बाहरी राज्यों के डाक्टरों व पैरामेडिकल अमले के लिए राज्य में पंजीयन की अनिवार्यता खत्म करने से स्थानीय युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
40 फीसदी खाली पदों से चरमराईं सेवाएं, सीधी भर्ती की मांग
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल अमले के करीब 35 से 40 प्रतिशत पद खाली हैं। अमले की कमी से अस्पतालों की व्यवस्था बिगड़ रही है। संघ ने मांग की है कि खाली पदों पर तुरंत नई सीधी भर्ती की जाए और अस्पतालों में कार्यरत संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
जीवनदीप समिति के कर्मचारियों का शोषण और स्वास्थ्य आयोग का गठन
प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जीवनदीप समिति के कर्मचारियों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। संघ ने पूरे राज्य में एक समान मानदेय लागू कर आर्थिक शोषण रोकने की मांग की है। इसके साथ ही प्रदेश में बेहतर इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए स्वतंत्र स्वास्थ्य आयोग गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
वर्जन…
अस्पतालों में लैब का निजीकरण और ठेका प्रथा स्वास्थ्य विभाग के अस्तित्व को खत्म कर देगा। 2023 में वादा करने के बावजूद नया वेतनमान अटका है। अगर सरकार ने निजीकरण रोका नहीं और खाली पदों पर सीधी भर्ती नहीं की, तो कर्मचारी हड़ताल के लिए मजबूर होंगे।
विकास कुमार शुक्ला, जिलाध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ बिलासपुर
