हत्या साबित नहीं, मुआवजा भी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
No murder proven, no compensation either: Supreme Court

बिलासपुर। रायगढ़ में बहुचर्चित आनंद अग्रवाल हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण और हाई कोर्ट द्वारा मृतक के स्वजन को दिए गए मुआवजे के आदेश को रद कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि मृतक आखिरी बार आरोपित की कार में देखा गया था और बाद में उसका शव मिला, यह नहीं माना जा सकता कि उसकी मृत्यु मोटर वाहन के उपयोग से हुई।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति आगस्टीन जार्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा तभी मिलेगा, जब वाहन के उपयोग और मृत्यु के बीच प्रत्यक्ष एवं कानूनी रूप से स्वीकार्य कारणात्मक संबंध स्थापित हो।
29 नवंबर 2009 को आनंद अग्रवाल अपने परिचित दिलीप अग्रवाल की कार में गए थे। तीन दिन बाद रायगढ़ के बिंजकोट गांव के पास उनका शव मिला। हत्या के आरोप में दो लोगों को दोषी ठहराया गया, लेकिन 2015 में हाई कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी के कारण उन्हें बरी कर दिया।
मृतक की पत्नी और बच्चों ने दावा किया कि हत्या कार में हुई थी, इसलिए यह मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे का मामला है। एमएसीटी ने 5.64 लाख रुपये और बाद में हाई कोर्ट ने बढ़ाकर 8.60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
रीता मामले से यह अलग
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रीता देवी मामले में वाहन चोरी ही अपराध का उद्देश्य था, जबकि आनंद अग्रवाल मामले में ऐसा कोई संबंध सिद्ध नहीं हुआ। ऐसे में मुआवजा दावा नहीं बन रहा है।
स्वजन को राहत, वसूली नहीं होगी
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एमएसीटी और हाई कोर्ट के मुआवजा आदेश रद कर दिए, लेकिन मानवीय आधार पर स्पष्ट किया कि यदि स्वजन को मुआवजे की राशि पहले ही मिल चुकी है तो उसकी वसूली नहीं की जाएगी।
