रायपुर

शिक्षक भर्ती: दस्तावेज सत्यापन शुरू

Teacher Recruitment: Document verification begins.

रायपुर। राज्य शासन ने शिक्षक नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत सहायक शिक्षक (एलबी) संवर्ग के शिक्षकों से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी गई है। इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। निर्धारित प्रारूप में जानकारी 15 जुलाई 2026 तक जिला शिक्षा कार्यालयों में उपलब्ध करानी होगी।

प्रदेशभर में टीईटी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दायरे में कोंडागांव सबसे आगे है, जहां 5,334 सहायक शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद बलौदाबाजार-भाटापारा में 4,535 और महासमुंद में 4,486 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा। दूसरी ओर मुंगेली में सबसे कम 245 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन प्रस्तावित है, जबकि रायपुर जिले में यह संख्या केवल 378 है, जो प्रदेश में दूसरी सबसे कम है।

विभाग का कहना है कि टीईटी प्रमाणपत्रों का सत्यापन नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और अभिलेखों को अद्यतन रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पात्रता संबंधी दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने में भी सुविधा होगी।

अधिक और कम शिक्षकों वाले प्रमुख जिले

बलौदाबाजार-भाटापारा में 4,535, महासमुंद में 4,486, सरगुजा में 4,328, रायगढ़ में 4,207, सूरजपुर में 4,151, बलरामपुर में 3,830, कबीरधाम में 3,750, गरियाबंद में 3,340, जांजगीर-चांपा में 3,164, कांकेर में 3,078 तथा धमतरी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3,053-3,053 शिक्षक टीईटी के दायरे में हैं। दूसरी ओर सबसे कम संख्या मुंगेली (245), रायपुर (378), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (478), सुकमा (658) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (862) में है।

प्रदेश के 80 हजार से अधिक शिक्षक देंगे परीक्षा

प्रदेशभर के 80 हजार से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के सामने अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की चुनौती है। 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि वे इस समय सीमा के भीतर परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उनकी नौकरी पर संकट आ सकता है। चिंता का विषय यह है कि इनमें से अधिकांश शिक्षक 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, और कई 54-55 वर्ष के भी हैं। ऐसे में लंबे समय बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए कठिन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट नहीं मिलेगी।

उच्च स्तर के प्रश्नों ने उड़ाई नींद

शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। टीईटी नियमित अंतराल पर आयोजित नहीं होती और कई बार दो-दो साल तक परीक्षा नहीं होती। साथ ही प्रश्नों का स्तर कई बार लोक सेवा आयोग (पीएससी) जैसा होने से अनुभवी शिक्षकों को भी कठिनाई होती है। विभाग मिशन मोड में हर तीन-चार महीने में टीईटी आयोजित करे, ताकि सभी शिक्षक समय-सीमा के भीतर परीक्षा दे सकें।

क्या कहा था 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने

टीईटी शिक्षक बनने और सेवा में रहने की अनिवार्य योग्यता है।
पांच वर्ष से अधिक सेवा शेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य।
पांच वर्ष से कम सेवा शेष शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिलेगी।
2001–2011 के बीच नियुक्त तीन श्रेणियों के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य।

जिलावार शिक्षकों की संख्या

कोंडागांव (5,334), बलौदाबाजार-भाटापारा (4,535), महासमुंद (4,486), सरगुजा (4,328), रायगढ़ (4,207), सूरजपुर (4,151), बलरामपुर (3,830), कबीरधाम (3,750), गरियाबंद (3,340), जांजगीर-चांपा (3,164), कांकेर (3,078), धमतरी (3,053), सारंगढ़-बिलाईगढ़ (3,053), बेमेतरा (2,945), बालोद (2,876), राजनांदगांव (2,776), दुर्ग (2,756), सक्ती (2,433), बीजापुर (1,940), बस्तर (1,779), जशपुर (1,544), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (1,381), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (1,349), कोरिया (1,317), नारायणपुर (1,300), दंतेवाड़ा (1,293), बिलासपुर (1,020), कोरबा (864), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (862), सुकमा (658), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (478), रायपुर (378), मुंगेली (245)

 

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