कोरबा

कनकी धाम में प्रकृति का अद्भुत नजारा, मंदिर परिसर में जुटे दुर्लभ पक्षी

Amazing view of nature in Kanki Dham, rare birds gathered in the temple premises.

कोरबा: जिले करतला विकासखंड के ग्राम कनकी में विदेशी एशियन बिल स्टार्क पक्षी का आगमन शुरू हो गया है। अब तक 100 से भी अधिक पक्षियों ने यहां शिव मंदिर परिसर में लगे पेड़ों में अपना डेरा जमा लिया है। जुलाई माह में ये पक्षी अंडे देते हैं। इसके लिए घाेसला निर्मााण की तैयारी कर दी है। पक्षियों को क्षेत्रवासी मानसून का संदेशा देने वाले देवदूत मानते हैं।

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर

कनकी में प्रवासी पक्षी एशियन ओपन बिल स्टार्क मानसून पहुंचने लगे हैं। पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण हो से वन विभाग ने कनकी सहित आसपास को को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। यहां बताना होगा कि ग्राम कनकी के स्वयंभू कनकेश्वर महादेव की महिमा दूर-दूर तक विख्यात है। सावन में यहां जल चढ़ाने के लिए के लिए महीने भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

बहरहाल पर्यटन विकास में एशियन बिल स्टार्क भी मंदिर परिसर में आकर्षण के केंद्र रहते हैं। अधिकांश पक्षी शिव मंदिर परिसर के ही पेड़ों में अपना घोसला बनाते हैं। कनकेश्वर शिव मंदिर के पुजारी पुरुषोत्तम यादव का कहना है कि पक्षी यहां वंशवृद्धि के लिए आते हैं।

जुलाई के अगस्त माह के बीच अंडे से चूजे निकल आते हैं। अक्टूबर नवंबर तक ये उड़ान भरने योग्य होने पर ये वापस चले जाते हैंं। पुजारी का यह भी कहना है कि गांव अन्य स्थानों में विविध वृक्ष हैं लेकिन अधिकांश पक्षी शिव मंदिर परिसर के पेड़ों में ही अपना घोसला बनाते हैं। धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को भी ये नष्ट कर किसानों के लिए सहयोगी होते हैं।

मानसून के देवदूत का आगमन: कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनकी में विदेशी मेहमान ‘एशियन ओपन बिल स्टार्क’ (घोघिंल) पक्षियों का आना शुरू हो गया है। अब तक 100 से अधिक पक्षी डेरा जमा चुके हैं।

शिव मंदिर से अटूट नाता: गांव में कई पेड़ होने के बावजूद ये पक्षी केवल स्वयंभू कनकेश्वर महादेव मंदिर परिसर के इमली, बरगद और पीपल के पेड़ों पर ही अपना घोंसला बनाते हैं। खास बात यह है कि ये हर साल उसी पेड़ पर लौटते हैं जहां पिछले साल थे।
किसानों के सच्चे मित्र: हसदेव नदी के दलदली तट पर रहने वाले ये पक्षी धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीड़े-मकोड़ों और घोंघों को खाकर किसानों की फसल की रक्षा करते हैं।सुरक्षा पर मंडराता खतरा: तड़ित चालक लगे होने के बावजूद आकाशीय बिजली (गाज) गिरने, शिकार होने और खेतों में अत्यधिक रासायनिक खादों के छिड़काव के कारण इन दुर्लभ पक्षियों की संख्या पहले के मुकाबले कम हो रही है।

 

Back to top button