मंत्री जी सुस्त, अधिकारी चला रहे अपनी मनमानी…
काम करना है तो 1.5 करोड़ का वर्क ऑर्डर दिखाओ वरना बाहर.... मनचाही कंपनियों को काम देने का नया तरीका

नवा रायपुर (अपडेट छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के सरकारी महकमों में विभागीय मंत्रियों की ढिलाई और अफसरों की बेलगाम मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। शासन के छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (नवा रायपुर, अटल नगर) द्वारा जारी किए गए इवेंट टेंडर (निविदा) ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नीतियों की पोल खोलकर रख दी है।
गिनी-चुनी कंपनियां अपने हिसाब से तैयार करवा रहीं टेंडर शर्तें
सूत्रों के अनुसार, कुछ गिनी-चुनी और रसूखदार कंपनियां विभागीय सांठगांठ के जरिए टेंडर के नियम और पात्रता मापदंड खुद अपने हिसाब से तैयार करवा रही हैं। मंडल द्वारा जारी टेंडर की तकनीकी शर्तों में विगत 3 वित्तीय वर्षों में न्यूनतम 1 करोड़ 50 लाख रुपये (1.5 Cr) का एकल कार्य अनुभव (Single Work Order) की अनिवार्यता रखी गई है।
यह शर्त इस तरह डिजाइन की गई है कि सिर्फ वही 2-3 मनचाही फर्में क्वालिफाई कर सकें जिन्होंने पहले से सांठगांठ कर रखी है। इस एक शर्त के कारण छत्तीसगढ़ की मध्यम वर्गीय कंपनियां, जो सालों से 20 लाख, 30 लाख या 50 लाख रुपये के दर्जनों इवेंट सफलतापूर्वक कर चुकी हैं, वे आवेदन करने की पात्रता से ही पूरी तरह वंचित हो गई हैं।
MSME नीति की खुली धज्जियां: मध्यम वर्गीय उद्योग दरकिनार
केंद्र और राज्य सरकार की MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) नीति में यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि सरकारी खरीद और निविदाओं में मध्यम वर्गीय एवं स्थानीय कंपनियों के लिए अवसर और स्थान सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है, ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
* MSME नियमों का उल्लंघन: टेंडर में 1.5 करोड़ के सिंगल वर्क ऑर्डर का ऐसा अव्यावहारिक रोड़ा अटकाया गया है जो MSME नीति की मूल आत्मा के खिलाफ है।
* मध्यम वर्गीय कंपनियों का बहिष्कार: MSME के तहत पंजीकृत मध्यम वर्गीय इवेंट कंपनियों को मौका देने के बजाय, टेंडर की शर्तों को इतना सख्त बना दिया गया है कि वे प्रतिस्पर्धा से ही बाहर हो जाएं।
* एकाधिकार (Monopoly) का खेल: नियम ऐसे बनाए जा रहे हैं जिससे केवल 2-3 बड़े खिलाड़ियों का एकाधिकार बने और वे मनमाने दामों पर सरकारी बजट का दोहन कर सकें।
विभाग का नाम | छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (नवा रायपुर) |
विवादित शर्त विगत 3 वित्तीय वर्षों में न्यूनतम ₹1.50 करोड़ का एकल वर्क ऑर्डर (Single Work Order)
MSME नीति का उल्लंघन | मध्यम वर्गीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में अवसर न देकर किया जा रहा बाहर
स्थानीय कारोबारियों और लोकल रोजगार पर ताला*
छत्तीसगढ़ में युवाओं को रोजगार देने और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने का दावा करने वाले इस विभाग में अफसरों का रवैया ठीक उल्टा नजर आ रहा है। जब टेंडर की शर्तें ही किसी खास सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने के लिए बनेंगी, तो:
* स्थानीय टैलेंट की अनदेखी: राज्य की योग्य और अनुभवी मध्यम वर्गीय एजेंसियों का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा।
* लोकल वेंडरों का नुकसान: काम बाहर की या सिंडिकेट कंपनियों के पास जाने से स्थानीय टेंट व्यवसायी, लाइट-साउंड तकनीशियन, मंच कलाकार और दैनिक मजदूर प्रभावित होंगे।
