फर्जी फर्म से करोड़ों की ठगी, दंपती को सश्रम कारावास
Couple sentenced to rigorous imprisonment for multi-crore fraud involving a fake firm.

राजनांदगांव। एबिस एक्सपोर्ट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से एक करोड़ 95 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी और गबन के चर्चित मामले में अपीलीय न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले में संशोधन करते हुए आरोपित दंपती को दोषी ठहराया है।
मामले में प्रमोद कुमार सिंह को कुछ धाराओं में तीन वर्ष के सश्रम कारावास, जबकि अन्य धाराओं में दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। उनकी पत्नी सीमा सिंह को भी विभिन्न धाराओं में दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।
जिला लोक अभियोजक राजेश खांडेकर के अनुसार मुंबई निवासी प्रमोद कुमार सिंह वर्ष 2014 में राजनांदगांव स्थित एबिस एक्सपोर्ट (इंडिया) में सेल्स वाइस प्रेसिडेंट के पद पर नियुक्त था। जांच में सामने आया कि उसने बीएसएसपी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के नाम से फर्जी फर्म का आवेदन प्रस्तुत कर नया डीलर बनवाया।
आवेदन में फर्जी पता, कूटरचित दस्तावेज और दूसरे व्यक्ति के नाम का उपयोग किया गया। इसके बाद कंपनी से मछली और झींगा आहार की बड़ी मात्रा में खरीदी गई, लेकिन उसकी पूरी राशि कंपनी को जमा नहीं कराई गई।
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन सेल्स वाइस प्रेसिडेंट प्रमोद कुमार और उनकी पत्नी सीमा सिंह की भूमिका पाई गई। दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के माध्यम से कंपनी के साथ कुल 1.95 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की।
प्रकरण में निचली अदालत ने आरोपितों को दोषी तो माना था, लेकिन दंड नहीं देने का आदेश पारित किया था। इसके विरुद्ध अपील दायर की गई थी। अपीलीय न्यायालय ने साक्ष्यों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद निचली अदालत के आदेश में संशोधन किया।
अदालत ने प्रमोद कुमार सिंह को तीन वर्ष के सश्रम कारावास व अन्य धाराओं के तहत दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
वहीं सीमा सिंह को अलग अलग धाराओं के तहत दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि प्रमोद कुमार सिंह को धारा 409 के तहत दी गई सजा अन्य धाराओं की सजा से पृथक भुगतनी होगी।
