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नेपाल के ‘चमत्कारी घर’ पहुंचे एक्टर सोनू सूद, बोले- पूरा गांव बर्बाद हो चुका है; मदद का ऐलान

नुवाकोट. नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई तबाही का जायजा लेने बॉलीवुड अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद नुवाकोट के सबसे प्रभावित इलाकों में पहुंचे हैं। उन्होंने उस इलाके का भी दौरा किया, जहां बाढ़ और मलबे ने पूरी बस्ती को लगभग मिटा दिया है, लेकिन एक हरे रंग का मकान अब भी मजबूती से खड़ा है। सोशल मीडिया पर यह घर ‘मिरेकल हाउस’ यानी ‘चमत्कारी घर’ के नाम से वायरल हो रहा है।

मौके पर हालात देखकर सोनू सूद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि आंखों के सामने हुई तबाही का अंदाजा लगाना मुश्किल है। जिस इलाके में कभी घर और परिवार बसे हुए थे, वहां अब मलबा ही मलबा दिखाई दे रहा है। सोनू ने कहा कि वह उन परिवारों के बारे में सोचकर बेहद दुखी हैं, जिनके घर तबाह हो गए और जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया।

सोनू सूद ने ANI से कहा, “आप अपनी आंखों के सामने तबाही देख सकते हैं। यह बहुत बड़ी है। आप उस हरे घर को देख सकते हैं, जिसे लोग ‘मिरेकल हाउस’ कह रहे हैं और जो इस बाढ़ में बच गया। लेकिन गांव का बाकी पूरा हिस्सा बर्बाद हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि इलाके के दूसरे हिस्से तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल है। वहां जाने में करीब नौ घंटे तक लग सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक राहत पहुंचाई जा सकेगी और नेपाल को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद मिलेगी।

जिस घर को लोग कह रहे हैं ‘चमत्कारी घर’, उसमें क्या हुआ था?
नुवाकोट के डुंगे बाजार इलाके में स्थित यह हल्के हरे रंग का करीब 40 साल पुराना मकान बाढ़ की भयावहता के बीच उम्मीद की तस्वीर बन गया है। 26 अगस्त को त्रिशूली नदी में आए विनाशकारी सैलाब ने आसपास के घरों, गाड़ियों और दुकानों को बहा दिया, लेकिन यह मकान काफी हद तक खड़ा रहा।

मकान के मालिक प्रकाश के मुताबिक, जब उन्हें पानी बढ़ने की सूचना मिली तो वह तुरंत अपने घर पहुंचे और परिवार को सुरक्षित करने की कोशिश की। कुछ ही देर में पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि बाहर खड़ी उनकी गाड़ी तक बह गई। इसके बाद परिवार घर के ऊपरी हिस्से की ओर चला गया।

परिवार के सदस्य पहले चौथी मंजिल तक पहुंचे, लेकिन पानी वहां तक भी पहुंचने लगा। इसके बाद उन्हें मकान के सबसे ऊपरी हिस्से में जाना पड़ा। करीब एक से डेढ़ घंटे तक परिवार बाढ़ के बीच फंसा रहा और नीचे पानी, कीचड़, पत्थर और मलबा बहता रहा।

प्रकाश के मुताबिक, उस समय उन्हें लग रहा था कि शायद यह उनकी जिंदगी का आखिरी पल हो सकता है। उनकी सबसे बड़ी चिंता अपने उस बेटे को लेकर थी, जो उस समय स्कूल गया हुआ था।

आखिर कैसे बच गया 40 साल पुराना घर?
इस मकान के बचने की वजह को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं। मकान के मालिक प्रकाश का कहना है कि घर करीब 40 साल पहले बनाया गया था और इसकी नींव को नदी के नजदीक होने के कारण खास तौर पर मजबूत बनाया गया था। उन्होंने बताया कि नींव के नीचे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की दो-तीन परतें भी डाली गई थीं।

मौके की रिपोर्टों में एक और अहम वजह मकान की दिशा और उसकी स्थिति बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मकान का अगला हिस्सा नदी के तेज बहाव के बिल्कुल सामने नहीं था, बल्कि एक कोण पर था। इससे पानी सीधे पूरी ताकत से दीवार से टकराने के बजाय मकान के किनारे से होकर निकल गया और संरचना पर दबाव अपेक्षाकृत कम पड़ा। हालांकि, किसी विस्तृत इंजीनियरिंग जांच के बिना इसे घर के बचने की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता।

घर की निचली मंजिलों को हालांकि भारी नुकसान हुआ। वहां दुकान का सामान और अन्य वस्तुएं रखी थीं, जिनमें से बड़ी मात्रा में सामान बाढ़ में बह गया। कई वाहन भी सैलाब की चपेट में आ गए।

पाइप और रस्सी के सहारे हुआ परिवार का रेस्क्यू
बाढ़ का पानी थोड़ा कम होने के बाद आसपास के लोगों ने परिवार को निकालने की कोशिश शुरू की। प्रकाश के अनुसार, पास के टोल इलाके के कुछ लोगों ने दोनों इमारतों के बीच पाइप लगाया और रस्सी की मदद से परिवार तक पहुंचे। इसी रास्ते से परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना में घर के अंदर मौजूद परिवार के सभी सदस्य बच गए। बाद में परिवार ने कहा कि उनकी बहुत सी संपत्ति या तो बाढ़ में नष्ट हो गई या मलबे में दब गई, लेकिन अब वे दोबारा जिंदगी शुरू करने की कोशिश करेंगे।

सोनू सूद ने मदद का किया ऐलान
सोनू सूद पहले ही नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद का ऐलान कर चुके हैं। उनकी Sood Charity Foundation की टीम भारत से राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंची है। इसमें भोजन और कंबल जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं। टीम प्रभावित इलाकों में जाकर यह भी पता लगा रही है कि लोगों को तत्काल किस तरह की मदद की जरूरत है।

सोनू ने कहा कि राहत सिर्फ तत्काल संकट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले महीनों में भी जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने दुनिया भर के लोगों से नेपाल के लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हम बस अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सबसे मुश्किल जगहों तक पहुंचें और वहां जो भी मदद संभव हो, वह पहुंचाएं।”

सोनू ने नेपाल के लिए भारत की ओर से जारी राहत एवं सहायता प्रयासों की भी सराहना की। उनका कहना है कि इस मुश्किल घड़ी में नेपाल को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। चालीस साल पुराना वह हरा मकान अब सिर्फ एक इमारत नहीं रह गया है। उसके आसपास की तबाही के बीच उसका खड़ा रहना उन परिवारों के लिए उम्मीद का प्रतीक बन गया है, जिन्होंने इस भयावह बाढ़ में अपना घर, सामान और अपनों को खो दिया।

news sources-लाइव हिन्दुस्तान

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