कोंडागांव वॉटरशेड परियोजना में विवाद: अधूरा काम और पूर्व भुगतान का आरोप
Controversy in Kondagaon Watershed Project: Allegations of incomplete work and advance payment

कोंडागांव।कोंडागांव जिले में कृषि विभाग द्वारा संचालित वाटरशेड परियोजना कोंडागांव एक बार फिर विवादों में आ गई है। बल्लारी नाला माइक्रो वाटरशेड अंतर्गत छोटे बजोड़ा के फरस गांव क्षेत्र में चल रहे कार्यों को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिना कार्य प्रगति के ही परियोजना की राशि का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार 30 मार्च 2025 को परियोजना बेंडररों को भुगतान कर के संबंधित राशि जारी कर दी गई, लेकिन धरातल पर कार्य में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग तीन महीने पहले कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अब तक न पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही निर्माण कार्य पूरा हो सका है। इससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन विभाग की भूमि पर वन विभाग की गाइडलाइन के विपरीत तरीके से स्टाफ डेम निर्माण की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कथित रूप से अनावश्यक कई पेड़ों की कटाई भी की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कृषि विभाग और वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कार्य कराया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक जब इस संबंध में वाटरशेड परियोजना प्रबंधक WDC कैलाश मरकाम एवं डीडीऐ को अवगत कराया गया, तब कथित रूप से मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। वहीं वन परिक्षेत्र दहीकोगांव के कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्र को वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बताया गया, जबकि कुछ अधिकारियों के बयान इससे अलग सामने आए। इससे विभागीय स्तर पर विरोधाभास की स्थिति बन गई है।
वन विभाग के कर्मचारियों नरेश यादव ने यह भी कहा कि यदि वनभूमि पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य किया जाता है, तो विभाग सामग्री जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे इसके बावजूद कार्य जारी रहने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगे जाने पर भी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। परियोजना अधिकारी एवं जन सूचना अधिकारी द्वारा कहा गया कि संबंधित शाखा से दस्तावेज प्राप्त नहीं होने के कारण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय किसान मंगलू राम सहित ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने की बात करती है, लेकिन जिले में लगातार विभागीय अनियमितताओं के मामले सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा वन संपदा को हुए संभावित नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
